Gujarat police demolishes Asaram Bapu Ashram illegally and without notice

भैरवी आश्रम पर अवैध रूप से बुल्डोजर चलाने की साजिश
आज दिनांक 27-11-2010 को संत श्री आसारामजी आश्रम, भैरवी, तह. चिखली, जि. नवसारी (गुजरात) पर प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही पूर्ण रूप से गैरकानूनी है आश्रम के बारे में वास्तविक तथ्य इस प्रकार हैं-

भैरवी तहसील-चिखली, जि.-नवसारी (गुज.) स्थित संत श्री आसारामजी आश्रम के बारे में वास्तविक तथ्य इस प्रकार हैं-
1) भैरवी ता. चिखली जि. नवसारी के ब्लॉक नंबर 55, 58,क व 59 में 1993 से संत श्री आसारामजी आश्रम द्वारा आदिवासी उत्थान की अनेकानेक सत्प्रवकृत्तियाँ जैसे कि व्यसनमुक्ति, बाल संस्कार, आदिवासी छात्रालय, आयुर्वेदिक व हौम्यपैथि चिकित्सालय, अनाज वितरण, आदिवासियों में समय-समय जीवन जरूरी चीज वस्तुओं का वितरण आदि की जा रही हैं। जिसके कारण इस क्षेत्र में काफी जन-जागृति आयी है। हजारों लोग व्यसन मुक्त हुए हैं, धर्मान्तरण की प्रवृत्ति पर रोक लगी है। विद्यार्थियों को लौकिक व आध्यात्मिक संस्कार मिल रहे हैं।
2) 1993 में ग्राम पंचायत भैरवी ने 1-1-1993 के ठराव नं. 4 से ये जमीन आश्रम को देने के लिए प्रस्ताव पारित किया था।
3) डी.एस.पी. वलसाड (गुज.) ने 18-12-95 के पत्र से ये जमीन आश्रम को देने के लिए सकारात्मक अभिप्राय दिया था।
4) राज्य सरकार ने 6-10-2001 के प्रस्ताव से संस्था को ये जमीन देने की मंजूरी दी।
5) तदनुसार कलेक्टर कचेरी नवसारी (गुज.) के 24-3-2003 के पत्र से जमीन की कीमत भरने के लिये आश्रम को सूचना मिली।
6) आश्रम द्वारा 27-3-2003 के पत्र द्वारा कलेक्टर द्वारा मांगी गयी रकम जमा कराने का चालान नं. 2149 प्रस्तुत किया।
7) कलेक्टर कचेरी नवसारी ने पत्र क्रमांक सी एच∕एल.एन.डी.∕वशी-742-49∕2003 तारीख 10-4-2003 के पत्र से भैरवी तहसील चिखली, जिला-नवसारी के ब्लाक नं.-55 की 10(दस) एकड़ जमीन जो कि फाईल के पृष्ठ क्रमांक-0-167 पर दर्शायी गयी है जिसके अन्तर्गत 2305 वर्गमीटर जमीन जिस पर निर्माण कार्य किया था एवं 38165 वर्गमीटर खुली जमीन शामिल है, आश्रम को देने का हुक्म (आदेश) दिया।
8) ग्राम पंचायत भैरवी द्वारा इस निर्माण कार्य को मकान नं.-293 को दर्शाया गया है जिसका नियमित रूप से कर (टैक्स) भी ग्राम पंचायत को दिया जाता है।
9) परंतु आज 16 वर्षों के बाद ग्राम पंचायत ने 31-12-2009 को नोटिस देकर कहा कि आश्रम को सत्संग मंडप के निर्माण कार्य सहित जो जमीन राज्य सरकार द्वारा दी गयी थी, वह सर्वे नं.कक-55 के अन्तर्गत नहीं आती अतः सत्संग मंडप निर्माणकार्य अवैध है इसलिए तोड़ दिया जाये।
10) सर्वे नं.55 के साथ लगी हुई सर्वे नं. 58 व 59 की लगभग 18000 वर्गमीटर जमीन जो कि खड्डे टेकरीयों वाली उबड़-खाबड़ खुली जमीन (ओपन लैण्ड) 17 वर्षों से अधिक समय से संस्था के शांति पूर्वक – सतत व प्रत्यक्ष कब्जे में है। उसे हजारों साधकों ने श्रमदान करके व लाखों रूपये के खर्च से नवसाध्य किया एवं वहाँ पर संस्था की आदिवासी उत्थान की अनेकविद उपरोक्त सेवा प्रवृत्तियाँ की जा रही है। उसे भी संस्था को आबंटित करने के लिए राज्य सरकार को आवेदन किया गया है व उस पर कार्यवाही चालु है।
11) ग्राम पंचायत कि नोटिस के खिलाफ चिखली के प्रिंसीपल सिविल जज की कोर्ट में रे.दी.मुं.नं. 1∕2010 से आश्रम द्वारा याचिका दाखिल की गयी। फिलहाल कोर्ट में केस पैंडिग है। इस दौरान आज दिनांक 27-11-2010 के सुबह 6 बजे से सर्दी के मौसम में अचानक ही ग्राम पंचायत के कुछ सदस्य द्वेष वृत्ति से जेसीबी व पुलिस का दल लेकर आश्रम पहुँचे एवं सत्संग मंडप आदि निर्माण कार्य जो कि राज्य सरकार ने उपरोक्त आदेश के द्वारा संस्था को आबंटित किया था, उसे अवैध रूप से तोड़ना चालु कर दिया। आज शनिवार ता.27-11-2010 को सरकारी कचहरी व न्यायालय में भी अवकाश होने से न ही कलेक्टर आदि कोई उच्च अधिकारी उपलब्ध है ना ही कोई न्यायाधीश। ऐसे में संस्था अपना न्यायपूर्ण पक्ष किसके समक्ष रखे।
12) कोई भी अवैध निर्माण कार्य तोड़ने से पहले भी कम से कम 72 घंटे पूर्व संबंधित संस्था को सूचना देना अनिवार्य है। लेकिन संस्था को ऐसी किसी भी प्रकार की नोटिस नहीं मिली।
13) इस तरह वर्षों पहले जो जमीन राज्य सरकार ने आबंटित की है, जिस निर्माण कार्य पर ग्राम पंचायत राजस्व वसूल कर रही है, न्यायालय में मामला लम्बित है, उसे अवैध बता कर बिना पर्याप्त कानूनी नोटिस के सरकारी कार्यालयों व न्यायालय में अवकाश के दिन, सर्दियों के सुबह 6 बजे, आकर अचानक तोड़ देना कितना न्यायपूर्ण है ? एक संस्था जिसके हजारों सेवाधारी तन मन धन न्यौछावर करके दूर दराज के आदिवासी क्षेत्रों में अनेक विध कल्याण कारी सेवा प्रवृत्ति कर रही है। जिससे लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। ऐसे उत्कृष्ट राष्ट्रीय सेवा कार्य में सहकार देने के बजाये, ऐसे सेवा कार्य की सराहना करने के बजाय कुछ लोगों द्वारा स्वार्थ व द्वेष पूर्ण रवैया अपनाकर एक हिन्दू संत के आश्रम में गैरकानूनी तोड़ फोड़ करना कितना न्यायपूर्ण है ?
व्यवस्थापक
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